[Top 5 Essay] Essay on Subhash Chandra Bose in Hindi-सुभाष चन्द्र बोस पर निबंध-Subhash Chandra Bose Essay in Hindi

[Top 5 Essay] Essay on Subhash Chandra Bose in Hindi-सुभाष चन्द्र बोस पर निबंध-Subhash Chandra Bose Essay in Hindi

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Essay on Subhash Chandra Bose in Hindi
 Essay on Subhash Chandra Bose in Hindi
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नेताजी सुभाष चन्द्र बोस का जन्म 23 जनवरी 1897 को हुआ और इनका निधन 18 अगस्त 1945 में हुआ था। जब इनकी मृत्यु हुयी तो ये केवल 48 वर्ष के थे। वो एक महान भारतीय राष्ट्रवादी नेता थे जिन्होंने ब्रिटिश शासन के खिलाफ भारत की आजादी के लिये द्वितीय विश्व युद्ध के दौरान बड़ी हिम्मत से लड़ा था। नेताजी 1920 और 1930 के दौरान भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस के स्वच्छंदभाव, युवा और कोर नेता थे। वो 1938 में कांग्रेस अध्यक्ष बने हालांकि 1939 में उन्हें हटा दिया गया था। नेताजी भारत के एक क्रांतिकारी स्वतंत्रता सेनानी थे जिन्होंने बहुत संघर्ष किया और एक बड़ी भारतीय आबादी को स्वतंत्रता संघर्ष के लिये प्रेरित किया।


सुभाष चन्द्र बोस पर छोटे तथा बड़े निबंध (Short and Long Essay on Subhash Chandra Bose, Subhash Chandra Bose par Nibandh Hindi mein)



निबंध 1 (250 शब्द)

भारतीय इतिहास में सुभाष चन्द्र बोस एक सबसे महान व्यक्ति और बहादुर स्वतंत्रता सेनानी थे। भारत के इतिहास में स्वतंत्रता संघर्ष के लिये दिया गया उनका महान योगदान अविस्मरणीय हैं। वो वास्तव में भारत के एक सच्चे बहादुर हीरो थे जिसने अपनी मातृभूमि की खातिर अपना घर और आराम त्याग दिया था। वो हमेशा हिंसा में भरोसा करते थे और ब्रिटिश शासन से स्वतंत्रता पाने के लिये सैन्य विद्रोह का रास्ता चुना।

उनका जन्म एक समृद्ध हिन्दू परिवार में 23 जनवरी 1897 को उड़ीसा के कटक में हुआ था। उनके पिता जानकी नाथ बोस थे जो एक सफल बैरिस्टर थे और माँ प्रभावती देवी एक गृहिणी थी। एक बार उन्हें ब्रिटिश प्रिसिंपल के ऊपर हमले में शामिल होने के कारण कलकत्ता प्रेसिडेंसी कॉलेज से निकाल दिया गया था। उन्होंने प्रतिभाशाली ढंग से आई.सी.एस की परीक्षा को पास किया था लेकिन उसको छोड़कर भारत की स्वतंत्रता की लड़ाई से जुड़ने के लिये 1921 में असहयोग आंदोलन से जुड़ गये।


सुभाष चन्द्र बोस
नेताजी ने चितरंजन दास के साथ काम किया जो बंगाल के एक राजनीतिक नेता, शिक्षक और बंगलार कथा नाम के बंगाल सप्ताहिक में पत्रकार थे। बाद में वो बंगाल कांग्रेस के वालंटियर कमांडेंट, नेशनल कॉलेज के प्रिंसीपल, कलकत्ता के मेयर और उसके बाद निगम के मुख्य कार्यकारी अधिकारी के रुप में नियुक्त किये गये।

अपनी राष्ट्रवादी क्रियाकलापों के लिये उन्हें कई बार जेल जाना पड़ा लेकिन वो इससे न कभी थके और ना ही निराश हुए। नेताजी कांग्रेस के अध्यक्ष के रुप में चुने गये थे लेकिन कुछ राजनीतिक मतभेदों के चलते गांधी जी के द्वारा उनका विरोध किया गया था। वो पूर्वी एशिया की तरफ चले गये जहाँ भारत को एक स्वतंत्र देश बनाने के लिये उन्होंने अपनी “आजाद हिन्द फौज” को तैयार किया।




निबंध 2 (300 शब्द)

सुभाष चन्द्र बोस पूरे भारत भर में नेताजी के नाम से मशहूर हैं। वो भारत के एक क्रांतिकारी व्यक्ति थे जिन्होंने भारत की आजादी के लिये बहुत बड़ा योगदान दिया। 23 जनवरी 1897 को उड़ीसा में कटक के एक अमीर हिन्दू परिवार में इनका जन्म हुआ।

इनके पिता का नाम जानकीनाथ बोस था जो कटक जिला न्यायालय में एक सरकारी वकील थे और माँ का नाम प्रभावती देवी था। सुभाष ने अपनी प्रारंभिक शिक्षा कटक में एंग्लों इंडियन स्कूल से ली और कलकत्ता विश्वविद्यालय, स्कॉटिश चर्च कॉलेज से दर्शनशास्त्र में स्नातक की डिग्री प्राप्त की।



वो एक बहादुर और महत्वकांक्षी भारतीय युवा थे जिसने सफलतापूर्वक आई.सी.एस परीक्षा पास होने के बावजूद अपनी मातृभूमि की आजादी के लिये देशबंधु चितरंजन दास द्वारा प्रभावित होने के बाद असहयोग आंदोलन से जुड़ गये। हमारी आजादी के लिये ब्रिटिश शासन के खिलाफ वो लगातार हिंसात्मक आंदोलन में लड़ते रहे।

महात्मा गांधी के साथ कुछ राजनीतिक मतभेदों के कारण 1930 में कांग्रेस के अध्यक्ष होने के बावजूद उन्होंने कांग्रेस को छोड़ दिया। एक दिन नेताजी ने अपनी खुद की भारतीय राष्ट्रीय शक्तिशाली पार्टी ‘आजाद हिन्द फौज’ बनायी क्योंकि उनका मानना था कि भारत को एक आजाद देश बनाने के लिये गांधीजी की अहिंसक नीति सक्षम नहीं है। अंतत: उन्होंने ब्रिटिश शासन से लड़ने के लिये एक बड़ी और शक्तिशाली “आजाद हिन्द फौज” बनायी।

वो जर्मनी गये और कुछ भारतीय युद्धबंदियों और वहाँ रहने वाले भारतीयों की मदद से भारतीय राष्ट्रीय सेना का गठन किया। हिटलर के द्वारा बहुत निराशा के बाद वो जापान गये और अपनी भारतीय राष्ट्रीय सेना को एक प्रसिद्ध नारा दिया “दिल्ली चलो” जहाँ पर आजाद हिन्द फौज और एंग्लों अमेरिकन बलों के बीच एक हिंसक लड़ाई हुयी। दुर्भाग्यवश, नेताजी सहित उन्हें आत्मसमर्पण करना पड़ा। जल्द ही, टोक्यो के लिये प्लेन में छोड़े गये हालांकि फारमोसा के आंतरिक भाग में प्लेन दुर्घटनाग्रस्त हो गया। ये रिपोर्ट किया गया कि उस प्लेन दुर्घटना में नेताजी की मृत्यु हो गयी। नेताजी का साहसिक कार्य आज भी लाखों भारतीय युवाओं को देश के लिये कुछ कर गुजरने के लिये प्रेरित करता है।

Essay on Subhas Chandra Bose in Hindi



निबंध 3 (400 शब्द)

नेताजी सुभाष चन्द्र बोस भारत के एक महान देशभक्त और बहादुर स्वतंत्रता सेनानी थे। वो स्वदेशानुराग और जोशपूर्ण देशभक्ति के एक प्रतीक थे। हर भारतीय बच्चे को उनको और भारत की स्वतंत्रता के लिये किये गये उनके कार्यों के बारे में जरुर जानना चाहिये। इनका जन्म 23 जनवरी 1897 को उड़ीसा के कटक में एक हिन्दू परिवार में हुआ था। उनकी प्रारंभिक शिक्षा उनके अपने गृह-नगर में पूरी हुयी थी जबकि उन्होंने अपना मैट्रिक कलकत्ता के प्रेसिडेंसी कॉलेज से किया और कलकत्ता विश्वविद्यालय के स्कॉटिश चर्च कॉलेज से दर्शनशास्त्र में ग्रेज़ुएशन पूरा किया। बाद में वो इंग्लैंड गये और चौथे स्थान के साथ भारतीय सिविल सेवा की परीक्षा को पास किया।

अंग्रेजों के क्रूर और बुरे बर्ताव के कारण अपने देशवासियों की दयनीय स्थिति से वो बहुत दुखी थे। भारत की आजादी के माध्यम से भारत के लोगों की मदद के लिये सिविल सेवा के बजाय उन्होंने राष्ट्रीय आंदोलन से जुड़ने का फैसला किया। देशभक्त देशबंधु चितरंजन दास से नेताजी बहुत प्रभावित थे और बाद में बोस कलकत्ता के मेयर के रुप में और उसके बाद भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस के अध्यक्ष चुने गये। बाद में गांधी जी से वैचारिक मतभेदों के कारण उन्होंने पार्टी छोड़ दी। कांग्रेस पार्टी छोड़ने के बाद इन्होंने अपनी फारवर्ड ब्लॉक पार्टी की स्थापना की।


वो मानते थे कि अंग्रेजों से आजादी पाने के लिये अहिंसा आंदोलन काफी नहीं है इसलिये देश की आजादी के लिये हिंसक आंदोलन को चुना। नेताजी भारत से दूर जर्मनी और उसके बाद जापान गये जहाँ उन्होंने अपनी भारतीय राष्ट्रीय सेना बनायी, ‘आजाद हिन्द फौज’। ब्रिटिश शासन से बहादुरी से लड़ने के लिये अपनी आजाद हिन्द फौज में उन देशों के भारतीय रहवासियों और भारतीय युद्ध बंदियों को उन्होंने शामिल किया। सुभाष चन्द्र बोस ने अंग्रेजी शासन से अपनी मातृभूमि को मुक्त बनाने के लिये “तुम मुझे खून दो, मैं तुम्हें आजादी दूंगा” के अपने महान शब्दों के द्वारा अपने सैनिकों को प्रेरित किया।


ऐसा माना जाता है कि 1945 में नेताजी सुभाष चन्द्र बोस की मृत्यु एक प्लेन दुर्घटना में हुयी थी। ब्रिटिश शासन से लड़ने के लिये उनकी भारतीय राष्ट्रीय सेना की सभी उम्मीदें उनकी मृत्यु की बुरी खबर के साथ समाप्त हो गयी थी। उनकी मृत्यु के बाद भी, कभी न खत्म होने वाली प्रेरणा के रुप में भारतीय लोगों के दिलों में अपनी जोशपूर्ण राष्ट्रीयता के साथ वो अभी-भी जिदा हैं। वैज्ञानिक विचारों के अनुसार, अतिभार जापानी प्लेन दुर्घटना के कारण थर्ड डिग्री बर्न की वजह से उनकी मृत्यु हुयी। एक अविस्मरणीय वृतांत के रुप में भारतीय इतिहास में नेताजी का महान कार्य और योगदान चिन्हित रहेगा।



सरल शब्दों में निबंध


Subhash Chandra Bose Essay in Hindi:- नेताजी सुभाष चंद्र बोस (Netaji Subhash Chandra Bose) हमारे देश के महान स्वतंत्रता सेनानियों में से एक हैं। इतिहास में सुभाष चंद्र बोस जैसे देशभक्त व्यक्ति बहुत कम ही देखने को मिलते हैं। सुभाष चंद्र बोस एक ऐसे देशभक्त थे, जो सेनापति, वीर सैनिक, कुशल राजनैतिज्ञ होने के साथ ही एक कुशल नेतृत्वकर्ता भी थे। उन्होंने अपना जीवन राष्ट्र के लिए समर्पित कर दिया, जो हम सब के लिए एक प्रेरणा स्त्रोत रहेगा। इन्हीं देशहित और आजादी के लिए अपना पूरा जीवन समर्पित करने वाले महान देशभक्त को भारत ने हर साल 23 जनवरी के दिन सुभाष चंद्र बोस जयंती (bose jayanti) मनाने का ऐलान किया।


इस दिन देश भर में विभिन्न देशभक्ति कार्यक्रमों का आयोजन किया जाता है। इस लेख में हम आपको निबंध पेश करेंगे, जिसके जरिए आप सुभाष चंद्र बोस के बारे में सारी जानकारी पा सकते है। इस निबंध को हमने सुभाष चंद्र बोस पर निबंध, हिंदी में नेताजी सुभाष चंद्र बोस पर निबंध,subhash chandra bose essay in hindi,सुभाष चंद्र बोस के बारे में निबंध,सुभाष चंद्र बोस पर निबंध PDF,सुभाष चंद्र बोस पर निबंध 500 शब्द,सुभाष चंद्र बोस पर 10 लाइन बिंदुओं पर आधारित है, नेता जी के बारे में सारी जानकारी पाने के लिए इस लेख को पूरा पढ़े।

Subhash Chandra Bose Essay in Hindi



नेताजी सुभाष चंद्र बोस पर निबंध | Subhash Chandra Bose Essay 100 words

हर साल की तरह इस साल भी नेताजी सुभाष चंद्र बोस(netaji subhash Chandra bose) के जन्मदिन को बड़े उत्साह के साथ मनाया जाएगा। साल 2022 में, सुभाष चंद्र बोस की जयंती रविवार को मनाई गई थी, वहीं इस साल 2023 में यह सोमवार को मनाई जाएगी। इस साल नेताजी के जन्म की 126वीं वर्षगांठ मनाई जाएगी। भारत देश को आजादी दिलाने में नेताजी सुभाष चंद्र बोस का अहम योगदान रहा है। उन्होंने अपने क्रांतिकारी कार्यों से भारत में आजादी के लिए लोगों में ज्वलंत नेतृत्व की भावना को बनाए रखा था। 

उनके द्वारा बनाए गए संगठन ने देश के कई हिस्सों को अंग्रेजी हुकूमत से मुक्त कराने का अहम प्रयास किया था। अपने बेहतरीन कूटनीति के द्वारा उन्होंने यूरोप के कई देशों से संपर्क करके उनसे भारतीय स्वतंत्रता संग्राम में सहयोग देने का प्रस्ताव रखे थे। नेताजी सुभाष चंद्र बोस भारतीय स्वतंत्रता संग्राम में महात्मा गांधी(mahatma Gandhi), जवाहर लाल नेहरू(Jawaharlal Nehru), लाला लाजपत राय, भगत सिंह(bhagat singh), चंद्रशेखर आजाद(Chandra shekhar azad) आदि जैसे प्रमुख क्रांतिकारियों में से एक थे। 


पराक्रम दिवस
23 जनवरी 

पराक्रम दिवस कब से मनाया जा रहा है
2021

2023 में सुभाष चंद्र बोस की कौन सी जयंती मनाई जाएगी
126 वीं

सुभाष चंद्र बोस का जन्म
23 जनवरी 1897 

सुभाष चंद्र बोस का जन्मस्थान
कटक, उड़ीसा 

सुभाष चंद्र बोस पिता नाम
जानकीनाथ बोस

सुभाष चंद्र बोस पिता का पेशा
वकील

सुभाष चंद्र बोस प्रसिद्ध भाषण
तुम मुझे खून दो, मैं तुम्हें आजादी दूंगा

सुभाष चंद्र बोस मृत्यु
18 अगस्त 1945

सुभाष चंद्र बोस मृत्यु स्थान
जापान




सुभाषचंद्र बोस के बारे में निबंध | Subhash Chandra Bose Essay 200 Words

नेताजी सुभाष चंद्र बोस का जन्म 23 जनवरी 1897 को बंगाल प्रांत(bangal residency) के उड़ीसा (odisha)प्रभाग के कटक शहर में हुआ था, इस दौरान पूरे भारत(india) में ब्रिटिश राज्य था। नेताजी(netaji) की माता का नाम प्रभावती देवी और पिता का नाम जानकीनाथ बोस था। इनके पिता पेशे से वकील थे और उन्हें रायबहादुर की उपाधि प्राप्त थी। जनवरी 1902 में सुभाष चंद्र बोस ने प्रोटोस्टेट यूरोपियन स्कूल में एडमिशन लिया था। इसके बाद इन्होंने रेनवेर्शा कॉलेजिएट स्कूल और फिर प्रेसिडेंसी कॉलेज में साल 1913 में मैट्रिक की परीक्षा में द्वितीय श्रेणी प्राप्त करने के बाद प्रवेश लिया । 

इनका राष्ट्रवादी चरित्र नेताजी की पढ़ाई के बीच में आ गया, जिस वजह से इन्हें स्कूल से निष्काषित कर दिया गया। इसके बाद इन्होंने स्कॉटिश चर्च कॉलेज(scottish church college) और फिर कैम्ब्रिज स्कूल में सिविल की परीक्षा में शामिल होने के लिए गए। इसके बाद उन्होंने सिविल परीक्षा(civil service) में चौथा स्थान प्राप्त किया, लेकिन इन्होंने ब्रिटिश सरकार के अधीन रहकर काम करने से मना कर दिया। अंत में सिविल की नौकरी से इस्तीफा दे दिया और भारत आ गए, जहां इन्होंने बंगाल प्रांत की (congress committee)कांग्रेस समिति के प्रमोशन के लिए स्वराज्य समाचार पत्र का प्रकाशन शुरू किया। 



सुभाष चंद्र बोस का पढ़ाई में बहुत मन था। इन्होंने उच्च शिक्षा के लिए विदेशों तक का सफर किया और (civil service) सिविल सेवा में नौकरी तक की है। राष्ट्रवादी विचारधारा के चलते नौकरी तो छोड़ी ही इसके अलावा कई तरह की परेशानियों का डटकर सामना भी किया। 1937 में इन्होंने (Austria ) आस्ट्रिया में एमिली शेंकल, जो कि एक पशु चिकित्सक की बेटी थी, के साथ शादी की थी। 


सन 1920-30 के दौरान ये (Indian national congress) भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस के नेताथे और साल 1938-39 में इसके अध्यक्ष चुने गए थे। वो अखिल भारतीय युवा कांग्रेस के अध्यक्ष के साथ-साथ बंगाल राज्य के कांग्रेस के सचिव के तौर पर भी चुने गए थे। वो फॉर्वर्ड समाचार पत्र के संपादक बन गए और(Kolkata) कलकत्ता के नगर निगम के सी.ई.ओ. के रूप में कार्य किया और ब्रिटिश सरकार के द्वारा घर में ही नजरबंद कर दिए गए। फिर उन्होंने ब्रिटिश शासन (British rule) से भारत को आजाद कराने के लिए सहयोग के तौर पर जर्मनी और जापान तक की यात्रा की । 


आखरी में 22 जून 1939 को अपने राजनीतिक जीवन को फॉर्वर्ड ब्लॉक (forward block) से संयोजित कर लिया। मुथुरलिंगम थेवर इनके बहुत बड़े राजनीतिक समर्थक थे। इन्होंने मुंबई में एक विशाल रैली का आयोजन किया। साल 1941-43 तक ये बर्लिन में रहे। नेताजी ने “तुम मुझे खून दो, मैं तुम्हें आजादी दूंगा” जैसे अपने प्रख्यात नारे के जरिए आजाद हिंद फौज का नेतृत्व किया । 6 जुलाई 1944 में इन्होंने अपने भाषण में महात्मा गांधी(mahatma Gandhi) को “राष्ट्रपिता” कहा था, जिसका प्रसारण सिंगापुर आजाद हिंद फौज के द्वारा किया गया था। उनका एक और प्रसिध्द नारा “दिल्ली चलो” आई.एन.ए. की सेनाओं को प्रोत्साहित करने के लिए था। 



सुभाष चंद्र बोस पर निबंध 500 शब्द | Subhash Chandra Bose Essay 500 words

भारत की आजादी में उनके बहुमूल्य योगदान को देखते हुए प्रतिवर्ष 23 जनवरी के दिन उनकी जयंती(jayanti) के तौर पर मनाया जाता है। इस दिन देश के विभिन्न स्थानों पर उनके स्मारकों तथा प्रतिमाओं पर राजनेताओं, विशिष्ट अतिथिगण तथा आम जनता के द्वारा माला पहनाई जाती है। इसके साथ ही स्कूलों और कॉलेजों  में कई तरह के देशभक्ति कार्यक्रम किए जाते हैं। 

इसमें बच्चों के द्वारा रैली निकालने के अलावा नेताजी सुभाष चंद्र बोस(netaji subhash Chandra bose) के जीवन पर भाषण तथा निबंध जैसे कार्यक्रमों का आयोजन किया जाता है। इसमें बच्चों द्वारा रैली निकालने के साथ ही नेताजी सुभाष चंद्र बोस के जीवन पर भाषण तथा निबंध जैसे कार्यक्रमों का आयोजन किया जाता है। इस दिन का सबसे भव्य इंतजाम पश्चिम बंगाल(West Bengal )में किया जाता है। जहां इस दिन कई तरह के सांस्कृतिक तथा सामाजिक कार्यक्रमों का आयोजन किया जाता है। इसके तहत कई तरह के स्वास्थ्य शिविर, निशुल्क भोजन शिविर जैसे कार्यों का आयोजन किया जाता है। 


23 जनवरी 1897 का दिन विश्व इतिहास में स्वर्ण अक्षरों में अंकित है। इस दिन स्वतंत्रता आंदोलन के महानायक सुभाष चंद्र बोस का जन्म कटक के प्रसिध्द वकील के यहां हुआ था। उनके पिता ने अंग्रेजों के दमन चक्र के विरोध में ‘रायबहादुर’ की उपाधि लौटा दी। इस से सुभाष चंद्र बोस के मन में अंग्रेजों के प्रति नफरत ने घर कर लिया, तब सुभाष अंग्रेजों से भारत को स्वतंत्र कराने का आत्म संकल्प ले लिया और राष्ट्रकर्म की राह पर चल पड़े। इस बात पर उनके पिता ने उनका उत्साह बढ़ाते हुए कहा ‘जब तुमने देश सेवा का व्रत ले ही लियाहै, तो कभी इस पथ से विचलित मत होना।’


आजाद हिंद फौज | Azad Hind Fauj
5 जुलाई 1943 को आजाद हिंद फौज(Azad Hind Fauj) का विधिवत गठन हुआ। उन्होंने एशिया के विभिन्न देशों में रहने वाले भारतीय का सम्मेलन कर उसमें अस्थाई स्वतंत्र भारत सरकार की स्थापना कर नेताजी ने आजादी प्राप्त करने के संकल्प को साकार किया। 12 सितंबर 1944 को रंगून के जुबली हॉल में शहीद यतींद्र दास की स्मृति पर नेता जी ने अत्यंत मार्मिक भाषण देते हुए कहा- अब हमारी आजादी निश्चित है, परंतु आजादी बलिदान मांगती है, आप मुझे खून दो और मैं आपको आजादी दूंगा। यही वाक्य देश के नौजवानों में जान फूंकने वाला वाक्य था,


जो भारत ही नहीं विश्व के इतिहास में भी अंकित है। 16 अगस्त 1945 को टोक्यो(Tokyo) के लिए निकलने पर ताईहोकु हवाई अड्डे पर यह वीर हमेशा के लिए हमें छोड़कर चला गया। नेताजी सुभाष चंद्र बोस भारतीय स्वतंत्रता आंदोलन(Indian independence movement) के एक अग्रणी नेता थे। बोस जी ने जनता के बीच राष्ट्रीय एकता, बलिदान और साम्प्रदायिक सौहार्द की भावना को जागृत किया था। 


सुभाष चंद्र बोस पर निबंध 10 लाइन | Subhash Chandra Bose Essay 10 Line

• नेताजी सुभाष चंद्र बोस का जन्म कटक, उड़ीसा में हुआ था। 

• वे अपने माता-पिता की नौ वीं संतान थे।

• नेताजी ने बी.ए. की परीक्षा कलकत्ता विश्वविद्यालय से प्रथम श्रेणी में पास की थी।

• नेताजी ने प्रशासनिक सेवा में चौथा स्थान प्राप्त किया था। 

• स्वामी विवेकानंद व अन्य से प्रभावित नेताजी ने नौकरी से इस्तीफा दे दिया।

• नेताजी भारतीय स्वतंत्रता संग्राम के वीर क्रांतिकारी नायकों में से एक थे।

• भगत सिंह को फांसी होने के बाद इनका गांधी जी से राजनीतिक मतभेद शुरू हो गया।

• लगभग 40 हजार भारतीयों के साथ नेताजी ने आजाद हिंद फौज बनाई थी।

• एक विमान दुर्घटना में 18 अगस्त 1945 में नेताजी की मृत्यु हो गई थी।  

• नेताजी के जन्म दिवस को पराक्रम दिवस के रूप में मनाया जाता है। 



FAQ’s Subhash Chandra Bose Essay in Hindi 2023

Q. सुभाष चंद्र बोस की पत्नी का नाम क्या था ?
Ans. एमिली शेंकल सुभाष चंद्र बोस की पत्नी का नाम था।

Q. सुभाष चंद्र बोस का जन्म कब हुआ था ?
Ans. 23 जनवरी 1897 को सुभाष चंद्र बोस का जन्म हुआ था।

Q. सुभाष चंद्र बोस ने पिता कौन थे ?
Ans. सुभाष चंद्र बोस के पिता पेशे से वकील थे।

Q. सुभाष चंद्र बोस की आजाद हिंद फौज में कितने लोग शामिल हुए?
Ans. 40,000 लोगों ने सुभाष चंद्र बोस की आजादी हिंदी फौज में शामिल हुए थे।

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