UPPSC APS Letter Writing Questions in Hindi-एपीएस परीक्षा के लिए उपयोगी सभी प्रकार के पत्र एवं उनमे अंतर
परीक्षा में अधिकतर कार्यालयी पत्र के प्रकार आते है। निचे विस्तृत रूप सब दिया गया है।
पत्र लेखन का अर्थ- पत्र लेखन एक ऐसी कला है, जिसके माध्यम से दो व्यक्ति या दो व्यापारी जो एक दुसरे से काफी दूरी पर स्थित हो, परस्पर एक दूसरे को विभिन्न कार्यों अथवा सूचनाओं के लिए पत्र लिखते है। पत्र लेखन का कार्य पारिवारिक जीवन से लेकर व्यापारिक जगत तक प्रयोग में लाया जाता है। पत्र लेखन का कार्य अत्यंत प्रभावशाली होता है, क्योंकि इस साधन के द्वारा अनेकों लोगो से संपर्क स्थापित करने में भी सुविधा रहती है।
पत्र लेखन की उपयोगिता अथवा महत्व –
आजकल दूर-दूर रहने वाले सगे संबंधियों व व्यापारियों को आपस में एक दूसरे के साथ मेल जोल रखने एवं संबंध रखने की आवश्यकता पड़ती है, इस कार्य में पत्र लेखन एक महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है।
निजी अथवा व्यापारिक सूचनाओं को प्राप्त करने तथा भेजने के
लिए पत्र व्यवहार विषय कारगर है । प्रेम, क्रोध, जिज्ञासा, प्रार्थना, आदेश, निमंत्रण
आदि अनेक भावों को व्यक्त करने के लिए पत्र लेखन का सहारा लिया जाता है।
पत्रों के माध्यम से संदेश भेजने में पत्र में लिखित सूचना
पूर्व रूप से गोपनीय रखी जाती है। पत्र को भेजने वाला तथा पत्र प्राप्त करने वाले के
आलावा किसी भी अन्य व्यक्ति को पत्र में लिखित संदेश पड़ने का अधिकार नहीं होता है।
मित्र, शिक्षक, छात्र, व्यापारी, प्रबंधक, ग्राहक व अन्य समस्त सामान्य व्यक्त्तियों व विशेष व्यक्तियों से सूचना अथवा संदेश देने तथा लेने के लिए पत्र लेखन का प्रयोग किया जाता है।
वर्तमान व्यावसायिक क्षेत्र में ग्राहकों को माल के प्रति संतुष्टि देने हेतु, व्यापार की ख्याति बढ़ाने हेतु, व्यवसाय का विकास करने हेतु इत्यादि अनेक कार्यों में पत्र व्यवहार का विशेष महत्व है।
पत्र लेखन के आवश्यक तत्व अथवा विशेषताएं-
पत्र लेखन से संबंधित अनेक महत्व है परन्तु इन महत्व का लाभ तभी उठाया जा सकता है जब पत्र एक आदर्श पत्र की भांति लिखा गया हो। पत्र में सम्मिलित निम्नलिखित तत्वों के कारण ही पत्र को एक प्रभावशाली रूप दिया जा सकता है।
भाषा- पत्र के अन्तर्गत भाषा एक विशेष तत्व है। पत्र की भाषा शिष्ट व नर्म होनी चाहिए। क्योंकि नर्म एवं शिष्ट पत्र ही पाठक को प्रभावित कर सकते हैं। कृपया, धन्यवाद जैसे आदि शब्दों का प्रयोग करके पाठक के मन को सीधे पत्र लिखने की भावना का महसूस कराना चाहिए।
संक्षिप्त- वर्तमान युग में प्रतिएक व्यक्ति के लिए समय धन से कम मूल्यवान नहीं होता। इस कारण व्यर्थ के लंबे पत्र लेखक व पाठक दोनों का अमूल्य समय व्यर्थ नष्ट करते है। मुख्य बातों को बिना संकोच के लिखा जाना चाहिए। अनावश्यक रूप से लंबे शब्दों को लिखने का परित्याग किया जाना चाहिए।
स्वच्छता- पत्र की भाषा सरल व स्पष्ट भी होनी चाहिए। साथ ही पत्र को साफ कागज पर अक्षरों का ध्यान रखते हुए साफ साफ लिखना चाहिए। यदि पत्र टाईप किया हुआ हो तो उसमे कोई गलती या काट – पीट नहीं होनी चाहिए। क्योंकि यह पाठक को अप्रिय लगती है तथा संशय भी उत्पन्न करती है।
रूचिपूर्ण- पत्र में रोचकता के बिना पाठक को प्रभावित नहीं किया का सकता, इसीलिए पाठक के स्वभाव व सम्मान को ध्यान में रखकर पत्र को प्रारंभ करना चाहिए। पत्र में पाठक के सम्बन्ध में प्रयोग होने वाले शब्दों आदरणीय, प्रिय, महोदय आदि शब्दों का प्रयोग करना चाहिए।
उद्देश्यपूर्ण- पत्र जिस उद्देश्य के लिए लिखा जा रहा हो, उस उद्देश्य को ध्यान में रखकर ही आवश्यक बातें पत्र के अन्तर्गत लिखनी चाहिए। पाठक का उद्देश्य पर ध्यान केंद्रित करने के लिए पत्र का उद्देश्यूर्ण होना परम आवश्यक है।
पत्र लेखन के प्रकार
पत्रों को लिखने के निम्न दो प्रकार होते है –
·
औपचारिक पत्र (Formal
Letter)
·
अनौपचारिक पत्र
(Informal Letter)
#1. औपचारिक पत्र(Formal Letter) – सरकारी तथा व्यावसायिक कार्यों से संबंध रखने वाले पत्र औपचारिक
पत्रों के अन्तर्गत आते है। इसके अतिरिक्त इन पत्रों के अन्तर्गत निम्नलिखित पत्रों
को भी शामिल किया जाता है।
·
प्रार्थना पत्र
·
निमंत्रण पत्र
·
सरकारी पत्र
·
गैर सरकारी पत्र
·
व्यावसायिक पत्र
·
किसी अधिकारी को पत्र
·
नौकरी के लिए आवदेन हेतु
·
संपादक के नाम पत्र इत्यादि।
औपचारिक पत्र का प्रारूप-
1)
औपचारिक पत्र लिखने की
शुरुआत बाईं ओर से की जाती है। सर्वप्रथम ‘सेवा में‘ शब्द लिखकर, पत्र पाने वाले का
नाम लिखकर, पाने वाले के लिए उचित सम्बोधन का प्रयोग किया जाता है। जैसे – श्री मान,
मान्यवर, आदरणीय आदि।
2)
इसके बाद पत्र पर पत्र
पाने वाले का “पता/ कंपनी का नाम” लिखा जाता है।
3)
तत्पश्चात पत्र जिस उद्देश्य
के लिए लिखा जा रहा हो उसका “विषय” लिखा जाना आवश्यक है।
4)
विषय लिखने के बाद एक
बार फिर पत्र पाने वाले के लिए सम्बोधन शब्द का प्रयोग किया जाता है।
5)
सम्बोधन लिखे के बाद,
पत्र के मुख्य विषय का विस्तृत में वर्णन किया जाता है।
6)
मुख्य विषय का अंत करते
समय उत्तर कि प्रतीक्षा में, सधन्यवाद, शेष कुशल आदि का प्रयोग किया जाना चाहिए।
7)
इसके बाद पत्र के अंतिम
भाग में “भवदीय, आपका आभारी, आपका आज्ञाकारी” इत्यादि शब्द लिखे जाने चाहिए।
8)
पत्र भेजने वाले का “नाम/कंपनी
का नाम, पता ,दिनांक” लिखते है।
9)
अंत में पत्र लिखने वाले
के हस्ताक्षर किए जाते है।
#2. अनौपचारिक पत्र (Informal Letter)– इन पत्रों के अन्तर्गत उन पत्रों को सम्मिलित किया जाता है,
जो अपने प्रियजनों को, मित्रों को तथा सगे- संबंधियों को लिखे जाते है। उदहारण के रूप
में – पुत्र द्वारा पिता जी को अथवा माता जी को लिखा गया पत्र, भाई-बंधुओ को लिखा जाना
वाला, किसी मित्र की सहायता हेतु पत्र, बधाई पत्र, शोक पत्र, सुखद पत्र इत्यादि।
अनौपचारिक पत्र का प्रारूप-
1) सबसे पहले बाई ओर पत्र भेजने वाले का “पता” लिखा जाता है।
2) प्रेषक के पते के नीचे “तिथि” लिखी जाती है।
3) भेजने वाले का केवल नाम नहीं लिखा जाता है। यदि अपने से
बड़ों को पत्र लिखा जा रहा है तो, “पूजनीय, आदरणीय, जैसे शब्दों के साथ उनसे संबंध
लिखते है। जैसे – पूजनीय पिता जी। यदि अपने से किसी छोटे या बराबर के व्यक्ति को पत्र
लिख रहे है तो उनके नाम के साथ प्रिय मित्र, बंधुवर इत्यादि शब्दों का प्रयोग किया
जाता है।
4) इसके बाद पत्र का मुख्य भाग दो अनुच्छेदों में लिखा जाता
है।
5) पत्र के मुख्य भाग की समाप्ति धन्यवाद सहित लिखकर किया जाता
है।
6) अंत में प्रार्थी, या तुम्हारा स्नेही आदि शब्दावली का प्रयोग करके लेखक के हस्ताक्षर किए जाते है।
कार्यालयी पत्राचार के विभिन्न रूप (Type of Official
Letter in Hindi)
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विस्तृत जानकारी निचे देंखे
पत्र: (Letter in Hindi)
इसका प्रयोग
विदेशी सरकारों, राज्य सरकारों, संबद्ध और अधीनस्थ कार्यालयों, सरकारी उपक्रमों, निर्वाचन
आयोग, सार्वजनिक निकायों आदि से औपचारिक पत्र-व्यवहार के लिए किया जाता है। यही नहीं
जनता और सरकारी कर्मचारियों का संस्थाओं अथवा संगठनों के सदस्यों के साथ भी पत्र-व्यवहार
हेतु पत्र का प्रयोग किया जाता है लेकिन भारत सरकार के विभिन्न मंत्रालयों के बीच पत्र-व्यवहार
हेतु इसका प्रयोग नहीं होता। पत्रों में संबोधन 'महोदय' के रूप में होता है और पत्र
के अंत में अधोलेख के रूप में 'भवदीय' का प्रयोग होता है।
2. अर्ध सरकारी पत्र:
सरकारी अधिकारियों
के आपसी पत्र-व्यवहार में विचारों और सूचनाओं के आदान-प्रदान के लिए अर्ध सरकारी पत्रों
का प्रयोग किया जाता है। इन पत्रों में किसी निर्धारित क्रिया-विधि की आवश्यकता नहीं
होती। जब अनुस्मारक भेजने पर भी कोई उपयुक्त उत्तर नहीं मिलता और किसी मामले पर किसी
अधिकारी को ध्यान दिलाना हो या आकर्षित करना हो तो वहां अर्ध सरकारी पत्र लिखा जाता
है। ये पत्र व्यक्तिगत रूप से किसी अधिकारी को उसके नाम से लिखे जाते हैं और अंत ‘आपका'
से होता है। अधिकारी इस पर हस्ताक्षर करते समय उसके नीचे आम तौर पर अपना नाम नहीं लिखते।
इसमें विषय नहीं लिखा जाता और पत्र भेजनेवाले अधिकारी का नाम और पदनाम ऊपर बाईं और
दिया जाता है और प्राप्त करने वाले का पूरा पता बाईं ओर दिया जाता है। यहां इसका एक
उदाहरण प्रस्तुत है.
3. तार:
ये अत्यंत जरूरी
अवसर पर ही भेजे जाते हैं लेकिन आजकल वायरलेस, फैक्स, एस.एम.एस. और इंटरनेट की सुविधा
होने के कारण इसकी उपयोगिता कम हो गई है। इसमें कम से कम शब्दों में अधिक से अधिक बात
कही जाती है और अत्यंत सावधानी रखी जाती है। बात का मंतव्य बिल्कुल स्पष्ट और संक्षिप्त
होता है लेकिन संक्षिप्तता के फेर में अटपटी भाषा के प्रयोग से बचना चाहिए अन्यथा अस्पष्टता
आ जाएगी। तार दो प्रकार के होते हैं- शब्दबद्ध तार और बीजंक (कूट भाषा)। जैसे - निदेशक
बीस को सुबह कालका मेल से चंडीगढ़ पहुंच रहे हैं
4. त्वरित पत्र:
इन पत्रों की
भाषा तार की ही तरह होती है और ये डाक से भेजे जाते हैं। प्राप्त करने वाले को भी उतनी
ही प्राथमिकता देनी होती है। इसमें भेजने वाले और प्राप्त करने वाले के पते विस्तार
से नहीं लिखे जाते और न ही विषय लिखा जाता है। इसका संकेत लाल रंग का होता है जो पत्र
के ऊपर चिपका दिया जाता है और जिस पर एक्सप्रेस लिखा होता हैं। अब इसका प्रचलन समाप्त
होता जा रहा है।
5. मितव्यय पत्र/कूट पत्र:
जब विदेशों
में स्थित अपने दूतावासों तथा अन्य कार्यालयों से पत्राचार करते समय कोई गुप्त बात
कहनी हो जिसे कूटभाषा में लिखना आवश्यक हो तो त्वरित पत्र के स्थान पर मितव्यय पत्र/कूट
पत्र भेजा जाता है। इसे साइफर तार की तरह कूट भाषा में लिखकर राजनयिक थैले या रजिस्ट्री
बीमा द्वारा भेजा जाता है। इसके द्वारा समुद्री तार का व्यय बचाया जाता है इसलिए इसे
मितव्यय पत्र की संज्ञा दी गई है।
6. कार्यालय ज्ञापन:
इनका प्रयोग
विभिन्न मंत्रालयों द्वारा आपसी पत्राचार हेतु किया जाता है। इसे अन्य पुरुष की शैली
में लिखा जाता है और संख्या सबसे ऊपर रहती है। इसमें संबोधन (महोदय, आदि) और अधोलेख
(भवदीय, आदि) नहीं होता है। केवल लिखने वाले का पदनाम और हस्ताक्षर होते हैं। कार्यालय
ज्ञापन जिस मंत्रालय को भेजा जाता है, उसका नाम हस्ताक्षर के नीचे पृष्ठ के बिल्कुल
बाईं ओर लिखा जाता है।
7. ज्ञापन:
ज्ञापन का प्रयोग
छुट्टी की स्वीकृति / अस्वीकृति, विलंब से आने के कारण, प्रार्थियों को नौकरी आदि के
संबंध में जानकारी देने के लिए किया जाता है। यह सरकारी आदेश के समान नहीं होते और
अन्य पुरुष में इन्हें लिखा जाता है और न ही इसमें संबोधन होता है और न अधोलेख, केवल
अधिकारी का हस्ताक्षर और उसका पदनाम होता है। पाने वाले का नाम और या पदनाम हस्ताक्षर
के नीचे बाईं ओर लिखा जाता है। इसके विपरीत अंतरकार्यालय ज्ञापन का प्रयोग सरकारी उपक्रमों
में एक विभाग/कार्यालय को सूचना के आदान-प्रदान के लिए किया जाता है। ये भारत सरकार
के मंत्रालयों/कार्यालयों/विभागों में नहीं लिखे जाते।
8. कार्यालय आदेश:
इसका प्रयोग
मंत्रालयों, विभागों तथा कार्यालयों में स्थानीय प्रयोजनो के लिए होता है। अनुभागों
या अधिकारियों के बीच कार्य विभाजन, कर्मचारियों की तैनाती, स्थानांतरण, छुट्टी, पदोन्नति
आदि विषयों पर कार्यालय आदेश' के रूप में आदेश प्रसारित किए जाते हैं। कार्यालय आदेश
के ऊपर संख्या, सरकार और मंत्रालय/कार्यालय का नाम अंकित रहता है। उसके बीचोंबीच कार्यालय
आदेश और साथ संख्या लिखी जाती है। नीचे दाहिनी ओर आदेश देने वाले अधिकारी के हस्ताक्षर
और पद नाम होता है। इसका लेखन भी अन्य में किया जाता है।
9 आदेश:
इस प्रकार के
पत्रों के माध्यम से केंद्र सरकार के कार्यालयों, विभागों आदि में नए पदो के सृजन,
कर्मचारियों से संबंधित महत्वपूर्ण विषयों पर सरकार द्वारा लिए गए निर्णयों की जानकारी,
प्रशासनिक मामलों में की गई कार्रवाई की सूचना, शक्तियों के प्रत्यायोजन आदि की जानकारी
दी जाती है।
10. परिपत्र:
परिपत्र उन
पत्रों, कार्यालय ज्ञापन, ज्ञापन, सूचनाएं, आदेश आदि को कहा जाता है जिनकी जानकारी
अनेक स्थानों को देनी पड़ती है या जिनके आधार पर अनेक स्थानों से जानकारी मंगानी होती
है। इन पत्रों को एक साथ अनेक स्थानों पर भेजा जाता है। परिपत्र में सबसे ऊपर दाई ओर
संख्या होती है और शेष स्वरूप वही रहता है जिस रूप (पत्र, कार्यालय ज्ञापन, ज्ञापन
आदि) में वे जारी होते हैं। सरकारी पत्र और परिपत्र में मुख्य अंतर यह है कि सरकारी
पत्र में जो भवदीय/भवदीया/आपका जैसे शब्दों का प्रयोग होता है, वह प्रयोग परिपत्र में
नहीं किया जाता। यह अन्य पुरुष के रूप में लिखा जाता है। इसमें संख्या, स्थान, दिनांक
आदि सरकारी पत्र की भांति होता है। इसे ‘गश्ती पत्र’ भी कहा जाता है।
11. अनुस्मारक:
अनुस्मारक किसी
पूर्व पत्र या अन्य किसी रूप (कार्यालय ज्ञापन, ज्ञापन, अर्ध सरकारी पत्र, तार आदि)
को किसी को स्मरण कराने के लिए भेजा जाता है। इसीलिए इसका अपना कोई रूप नहीं होता।
यदि एक ही विषय पर एक से अधिक बार अनुस्मारक भेजा जाता है तो सबसे ऊपर दाईं ओर लिख
दिया जाता है कि 'दूसरा अनुस्मारक', 'तीसरा अनुस्मारक |' इससे पत्र पढ़ने का ध्यान
तत्काल उस पर जाता है।
12. नोटिस:
इसे सूचना भी
कहते हैं। इसके द्वारा किसी वर्ग विशेष/सर्व साधारण को जानकारी दी जाती है जो देने
योग्य होती है और इसे नोटिस बोर्ड पर लगा दिया जाता है। इसे परिपत्र की तरह सभी अनुभागों
में भेजा भी जाता है और कुछ मामलों में (कोर्ट आदि से संबंधित नोटिस) डाक से प्रेषित
किया जाता है।
13. पृष्ठांकन:
जब कोई कागज मूल रूप में भेजने वाले को ही लौटाना हो या किसी और मंत्रालय या संबद्ध या अधीनस्थ कार्यालय को सूचना, टीका-टिप्पणी या निपटाने के लिए मूल पत्र या उसकी नकल के रूप में भेजना हो तब इसका प्रयोग किया जाता है। पृष्ठांकन में औपचारिक संबोधन, उपसंहार और समापन नहीं होता। इसमें अत्यधिक संक्षेप में लिखा जाता है।
14. विज्ञापन:
इसका अर्थ होता
है विशेष रूप से सूचना देना । विभिन्न कार्यालय अनेक प्रकार के विज्ञापन निकालते हैं
जो नौकरी से संबंधित भी होते हैं, नीलामी से भी संबंधित भी होते है और कार्यालय के
स्थान और समय के परिवर्तन आदि से भी संबंधित भी होते हैं।
15. निविदा सूचना:
इस प्रकार के पत्रों में सरकार की ओर से सामान खरीदने, निर्माण कार्य को पूरा करने या किसी कार्य को करने के लिए निविदा सूचनाएं जारी की जाती हैं। इसमें जो भी कार्य किया जाना है उसका पूरा विवरण दिया जाता है।
16. अधिसूचना:
नियमों और प्रशासनिक आदेशों की घोषणा, शक्तियों का सौंपा जाना, राजपत्रित अधिकारियों की नियुक्ति, छुट्टी, तरक्की आदि का भारत के राजपत्र में प्रकाशित करके अधिसूचित करने के लिए इसका प्रयोग किया जाता है। इसके अतिरिक्त अध्यादेश, अधिनियम, स्वीकृत विधेयक तथा संकटकालीन घोषणाएं भी अधिसूचित की जाती है। कभी-कभी यदि अधिसूचना बहुत महत्वपूर्ण है तो 'असाधारण राजपत्र' भी प्रकाशित किया जाता है।
17. प्रेस विज्ञप्ति या प्रेस नोट:
सरकार के किसी
निर्णय अथवा महत्वपूर्ण जानकारी, जिसका बहुत अधिक प्रचार करने की आवश्यकता होती है,
उसके लिए प्रेस विज्ञप्ति या प्रेस नोट जारी किया जाता है। प्रेस विज्ञप्ति प्रेस नोट
की अपेक्षा अधिक औपचारिक होती है इसलिए उसे यथावत छापा जाता है। इसमें कोई हेर-फेर
नहीं हो सकता जबकि प्रेस नोट को आवश्यकता के छोटा या बड़ा किया जा सकता है।
18. अनौपचारिक टिप्पणियां:
किसी मंत्रालय
या मंत्रालय से संबद्ध कार्यालय के बीच प्रस्ताव पर अन्य मंत्रालयों के विचार, टीका-टिप्पणी
आदि प्राप्त करने के लिए, मौजूदा अनुदेशों के बारे में स्पष्टीकरण आदि कराने के लिए
या कोई सूचना या कागज पत्र मंगवाने के लिए पत्राचार के इस तरीके का प्रयोग किया जाता
है। इसे अशासनिक ज्ञापन भी कहा जाता है। इसमें संबोधन या अंत में किसी प्रकार के आदरसूचक
शब्दों का प्रयोग नहीं होता तथा संख्या और दिनांक प्राप्त करने वाले मंत्रालय/विभाग
के नीचे रेखा खींचकर दी जाती है। इसे दो रूपों में भेजा जाता है। इसे या तो मिसिल पर
अपनी टिप्पणी लिखकर उसी को मंत्रालय / कार्यालय को भेजा जाता है या एक नोट शीट पर टिप्पणी
लिखकर तथा टंकित कराकर भेजा जाता है जो अपने आपमें पूर्ण होती है। इसमें न तो कोई संख्या
डाली जाती है और न संबोधन होता है और न कोई आदरसूचक शब्द | केवल पदनाम के साथ हस्ताक्षर
कर दिया जाता है और जहां भेजना है, उसका नाम व पता होता है। सेवा में नहीं लिखा जाता।
सबसे नीचे एक रेखा खींचकर भेजने वाले मंत्रालय / कार्यालय का नाम पता, संख्या और दिनांक
अंकित किया जाता है।
20. आवेदन पत्र:
ये नौकरी आदि
के संबंध में भी होते हैं और कार्यालय में कार्यवाही (छुट्टी, स्थानांतरण, वेतन वृद्धि,
अग्रिम राशि, आवास आवंटन आदि) से भी संबंधित होते हैं। इनकी विविधता समय और विषय के
अनुसार निर्भर करती है।
21. अभ्यावेदनः
यह भी आवेदन
पत्र का एक ही रूप है। इसे प्रार्थी अपने प्रति हो रहे दुर्व्यवहार, अनाचार, अत्याचार
आदि को दूर कराने हेतु प्रशासन, प्रधानमंत्री या राष्ट्रपति आदि को लिखता है। इसमें
करुणा और दया पैदा करने वाले शब्दों का प्रयोग किया जाता है।
22. प्राप्ति सूचना:
इस प्रकार के
पत्रों में पत्र या कार्यालय ज्ञापन भेजने वाले कार्यालय इस बात का उल्लेख कर देते
हैं कि इसकी प्राप्ति स्वीकार करें। ऐसी स्थिति में प्राप्त करने वाले कार्यालय को
लिखित रूप में पत्र की प्राप्ति की सूचना देनी होती है।
23. संकल्प:
यह सरकारी पत्राचार
का एक ऐसा रूप है जिसका प्रयोग विशेष परिस्थितियों में किया जाता है। ये परिस्थितियां
निम्नांकित हो सकती हैं-
-जब सरकार नीति
संबंधी किसी महत्वपूर्ण प्रश्न पर सार्वजनिक घोषणा करती है।
-जांच आयोग/समिति
के प्रतिवेदनों पर कोई घोषणा करनी होती है।
- जब किसी जांच आयोग/समिति की घोषणा की जाती है और उसके क्षेत्राधिकार व शक्तियों का उल्लेख किया जाता है।
यह अन्य पुरुष
में लिखा जाता है और राजपत्र में प्रकाशित किया जाता है। प्रस्तावना (पृष्ठभूमि), संकल्प
(रूपरेखा), आदेश और आवश्यक निर्देश (जिनको इसकी प्रति भेजनी है) इसके चार अंग होते
हैं। इसमें संबोधन, अधोलेख का स्थान नहीं होता।
उदाहरण
सहित पत्र लेखन देंखे
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कार्यालयी पत्र – सरकारी या कार्यालयी पत्र, प्रारूप या रूपरेखा और उदाहरण
कार्यालयी
पत्र या सरकारी पत्र
कार्यालयी पत्र (Official Letter): ‘कार्यालयी पत्र’ अंग्रेजी
के ‘ऑफीशियल लेटर’ का हिन्दी रूपान्तर है। इस प्रकार के पत्रों का आदान-प्रदान
जिन-जिन के बीच होता है, उनमें से प्रमुख निम्नांकित हैं-
- किसी
देश की सरकार और अन्य देश की सरकार के बीच
- केन्द्र
सरकार और राज्य सरकार के बीच
- सरकार
और दूतावासों के बीच
- एक
राज्य सरकार और दूसरी राज्य सरकार के बीच
- सरकार
और अन्य देशी-विदेशी संस्थानों, संघों या संगठनों के बीच
- सरकार
और अन्य विभागों के बीच
- विशिष्ट
विभाग और अधीनस्थ विभागों के बीच
- सरकार
और व्यक्ति विशेष के बीच
- विभिन्न
कार्यालयों और व्यक्ति विशेष के बीच
इस प्रकार के समस्त पत्र कार्यालयी पत्राचार की
व्यापक सीमा में आते हैं। कार्यालय का आशय, किसी सरकारी, अर्द्धसरकारी, गैर
सरकारी, स्वायत्तशासी, वह स्थान विशेष है जहाँ से प्रशासन का संचालन होता है।
इसीलिए इस प्रकार के पत्रों को शासकीय या प्रशासकीय पत्र भी कहते हैं
कार्यालयी
पत्र में ध्यान देने योग्य बातें
- सबसे
ऊपर दायीं ओर कार्यालय, विभाग, संस्थान या मंत्रालय का नाम मुद्रित या टंकित
होना चाहिए। पता और पिनकोड भी यहीं लिखना होता है।
- उसके
नीचे दिनाँक, कभी-कभी दिनाँक ऊपर न देकर पत्र के अन्त में बायी ओर लिखा जाता
है।
- प्रेषक
का नाम पद और पता लिखते हैं।
- प्रेषक
के नाम, पद,पता लिखकर उसके नीचे ‘सेवा में लिखते हुए प्रेषिती (पत्र पाने
वाले) का नाम-पद-पता लिखना चाहिए।
- जिस
विषय को लेकर पत्र लिखा जा रहा है उसका उल्लेख प्रेषिती के थोड़े नीचे से
मध्यभाग में ‘विषय’ शब्द लिखकर किया जाता है।
- बायीं
तरफ प्रेषिती को सम्बोधन के लिए ‘महोदय’, ‘महोदया’, ‘मान्यवर’ आदि लिखा जाता
है।
- पत्र
प्रारम्भ करने से पूर्व प्राप्त पत्र या भेजे गए पत्र की संख्या और दिनांक का
उल्लेख कर देना चाहिए।
- इसके
बाद मूल पत्र लिखा जाना चाहिए।
- प्रत्येक
बात के लिए पृथक् अनुच्छेद का प्रयोग करना चाहिए।
- पत्र
में जहाँ तक सम्भव हो, उत्तम पुरुष (मैं, हम) शैली का प्रयोग में नहीं लाना
चाहिए। अन्य पुरुष शैली ही उपयुक्त रहती है।
- पत्र
की भाषा शिष्ट, सरल और सुसंगत होनी चाहिए।
- पत्र
समाप्ति के बाद बायीं ओर भवदीय, आपका विश्वासपात्र या सद्भावनापूर्वक
आपका,लिखकर हस्ताक्षर किये जाते हैं।
- हस्ताक्षर
के नीचे कोष्ठक में अपना नाम लिख देना चाहिए। ऊपर अगर पद और पता नहीं दिया
गया है तो नीचे लिख देना चाहिए।
- सभी
सम्बन्धित अधिकारियों या विभागों का पत्र का पृष्ठांकन किया जाना अपेक्षित
होता है।
- आवश्यक
संलग्न क्रम संख्या लिखकर संलग्न कर देना चाहिए।
कार्यालयी पत्र के विविध प्रकार
कार्यालयी
पत्र के प्रमुख प्रकार निम्नलिखित हैं-
- शासनादेश
(Govermnent Order)
- कार्यालय
आदेश (Office Order)
- परिपत्र
(Circular)
- अनुस्मारक
या स्मरण पत्र (Reminder)
- अर्द्धशासकीय
या अर्द्धसरकारी पत्र (Semi-Official Letters)
- अधिसूचना
(Notification)
- कार्यालय
ज्ञापन (Official Memorandum)
- ज्ञापन
(Memorandum)
- अशासनिक
पत्र (Unofficial letters)
- पृष्ठांकन
(Endorsement)
- संकल्प
या प्रस्ताव (Resolution)
- स्वीकृति
या मंजूरी पत्र (Sanction letter)
- प्रेस
विज्ञप्ति (Press Communique/Pru-Note)
- सूचना
(Notice)
- पावती
(Acknowledgement)
- तार
- मितव्यय पत्र
कार्यालयी पत्रों के उदाहरण:-
1. शासनादेश
(Government Order)
ऐसे पत्रों को शासनादेश कहते हैं जिनके माध्यम से
सरकार द्वारा लिये गये निर्णयों को अधीनस्थ विभागों को सम्प्रेषित किया जाता है।
ध्यान रखें कि-
- शासनादेश
प्रायः सरकार के सचिव के द्वारा विभागों को भेजे जाते हैं।
- पत्र
लेखक सामान्यतः यह लिखकर पत्र प्रारम्भ करता है कि “मुझे आपको। यह
लिखने/सूचित करने/अनुरोध करने का निर्देश/आदेश हुआ है कि……”
- कभी-कभी
“आदेश दिया जाता है कि………” से भी शासनादेश का प्रारम्भ होता है।
- ये
पत्र प्रथम पुरुष एक वचन (मैं) में ही लिखे जाते हैं।
सामान्यतः इन पत्रों का उपयोग किसी नीतिगत
निर्णय, वित्तीय स्वीकृतियों कर्मचारियों के वेतन-भत्ते एवं सेवा नियमों के
सम्बन्ध में सरकार निर्णयों की सूचना और क्रियान्विति के लिए किया जाता है।
शासनादेश
लिखने की रीति
- सबसे
ऊपर पत्र संख्या दी जाती है।
- इसके
बाद सरकार, मंत्रालय, विभाग का उल्लेख रहता है।
- इसके
बाद स्थान और दिनांक होता है, इन्हें दायीं ओर भी लिखा जाता है।
- बायीं
ओर भेजने वाले का नाम-पद-पता लिखते हैं और कई बार नहीं भी लिखा जाता।
- प्राप्तकर्ता
का नाम, पता और सम्बोधन नहीं दिया जाता।
- सम्बन्धित
विभागों को पत्र की प्रतिलिपि भेज दी जाती है।
- अन्त
में हस्ताक्षर और पद का उल्लेख किया जाता है।
उदाहरण-
पत्र संख्या -क/2/27/2020 (च)
राजस्थान सरकार,
शिक्षा मन्त्रालय,
भाषा विभाग,
जयपुर
दिनांक 19.9.2020
प्रेषक
अरविन्द मेहता,
सचिव, राजस्थान सरकार,
शिक्षा विभग
शासनादेश है कि निम्नांकित प्रपत्रों और पत्रों में राजभाषा हिन्दी का उपयोग किया
जाए-
- वेतन,
बिल, यात्रा बिल, सभी प्रकार के आवेदन-पत्र तथा इन सबके सम्बन्ध में किया
जाने वाला पत्राचार।
- सभी
प्रकार की टिप्पणियाँ और आदेश।
- हिन्दी-भाषी
राज्यों के साथ पत्राचार।
- केन्द्र
सरकार से प्राप्त हिन्दी में लिखे पत्रों के उत्तर।
- अंग्रेजी
में लिखे सभी पत्रों में हस्ताक्षर हिन्दी में किए जाएँ।
हस्ताक्षर….
शासन सविच
प्रतिलिपि
सूचनार्थ एवं आवश्यक कार्यवाही हेतु निम्नांकित को प्रेषित है–
(1) सचिव, राज्यपाल।
(2) सचिव, मुख्यमंत्री।
(3) समस्त सचिव, उपसचिव, सहायक सचिव, राज्य
सचिवालय।
(4) सरकार के अधीनस्थ समस्त कार्यालय अध्यक्ष
एवं विभागाध्यक्ष।
2. कार्यालय आदेश
(Office Order)
यह वह कार्यालयी पत्र है जिसमें किसी मन्त्रालय,
विभाग एवं कार्यालय के कर्मचारियों को उनकी नियुक्ति, स्थायीकरण, स्थानान्तरण,
पदोन्नति, अवकाश स्वीकृति-अस्वीकृति आदि के विषय में आन्तरिक प्रशासन सम्बन्धी
आदेश प्रसारित किये जाते हैं।
कार्यालय आदेश पत्र में-
- ऊपर
बायीं ओर अन्य पत्रों की तरह प्रेषक और प्रषिती का नाम-पद-पता एवं सम्बोधन का
प्रयोग नहीं होता है।
- नीचे
‘भवदीय’, ‘आपका विश्वासपात्र’ जैसा स्वनिर्देश भी नहीं होता।
- अन्त
में दायीं ओर प्रेषक हस्ताक्षर और पद का नाम रहता है।
- अन्त
में ही बायीं ओर पत्र पाने वाले विभाग या व्यक्ति का नाम लिख दिया जाता है।
- यह
पत्र अन्य पुरुष में लिखा जाता है।
- शेष
बातें अन्य पत्रों जैसी होती हैं।
उदाहरण-
पत्र संख्या-नि.का.शि./75/425/200
भारत सरकार
शिक्षा मन्त्रालय
नई दिल्ली
दिनांक 29.9.2020
भाषा विभाग के अधोलिखित महानुभावों को दिनांक
6.9.2020 से 20000-2000-25000 की वेतन श्रृंखला में अनुभाग अधिकारी के रूप में
पदोन्नत किया जाता है-
- श्री
विवेक शर्मा पुत्र श्री हरीश शर्मा
- श्री
रामसिंह मीणा पुत्र श्री रामकेश मीणा
- श्री
रामफूल बैरवा पुत्र श्री श्यामलाल बैरवा
हस्ताक्षर
सचिव
प्रतिलिपि आवश्यक कार्यवाही हेतु प्रेषित है-
- निदेशक,
भाषा विभाग
- श्री
विवेक शर्मा
- श्री
रामसिंह मीणा
- श्री
रामफूल बैरवा
- लेखा
शाखा
- संस्थापन
शाखा
3. परिपत्र
(Circular)
जिस पत्र के माध्यम से जब कोई एक सूचना, निर्देश या
अनुदेश एक साथ ही अनेक मंत्रालयों, कार्यालयों, विभागों, अधिकारियों, कर्मचारियों
तक भेजी जाती है तो उस पत्र को परिपत्र कहते हैं परिपत्र में-
- ऊपर
बायीं ओर प्रेषक का नाम-पद-पता नहीं दिया जाता।
- जिनको
यह पत्र भेजा जाता है, उनके पद का नाम-पता अन्त में बायीं ओर दिया जाता है।
- कई
बार ज्ञापन, कार्यालय-ज्ञापन परिपत्र का रूप ले लेते हैं।
- पत्र
के अन्त में भवदीय, आपका, आपका विश्वासपात्र जैसे स्वनिर्देशों का प्रयोग
नहीं किया जाता।
- इसमें
अन्य पुरुष शैली का ही प्रयोग किया जाता है।
- कभी-कभी
प्रेषक का नाम-पद पता और सेवा में लिखकर प्रेषिती का पद एवं पता तथा सम्बोधन
भी किया जाता है।
- कुछ
परिपत्रों में पत्र का विषय भी लिखा जाता है।
उदाहरण 1:
परिपत्र संख्या 25.4.95/रा.स./200
समाज कल्याण विभाग,
राजस्थान सरकार,
जयपुर
दिनांक 4.9.2020
राजस्थान के मुख्यमंत्री ने यह जानना चाहा है कि
प्रदेश के विद्यालयों, महाविद्यालयों व विश्वविद्यालयों में अनसचित जातियों एवं
अनुसूचित जनजातियों की कितनी लड़कियों का इस वर्ष प्रवेश दिया गया है ? आज प्रदेश
की शिक्षण संस्थाओं में अनुसूचित जातियों एवं अनुसूचित जनजातियों की कितनी
छात्राएँ पढ़ रही है ? विगत तीन वर्षों की तुलना में उनकी संख्या में वृद्धि का
प्रतिशत क्या है ? उपयुक्त मंत्रालय को पन्द्रह दिन के भीतर तथ्य आँकड़े भिजवा
दिये जाने चाहिएँ।
हस्ताक्षर
सचिव,
समाज कल्याण विभाग
राजस्थान, जयपुर
प्रतिलिपि प्रेषित है-
- निदेशक,
स्कूली शिक्षा
- निदेशक,
कॉलेज शिक्षा
- समस्त
जिला शिक्षा अधिकारी
- समस्त
महाविद्यालयों के प्राचार्य
- समस्त
महाविद्यालयों के कुलसचिव
उदाहरण 2:
परिपत्र संख्या 215/6/200
शासन सचिवालय
राजस्थान सरकार,
जयपुर
दिनांक 5.9.2020
प्रेषक
:
मुख्य सचिव,
राजस्थान सरकार,
जयपुर
सेवा में:
राजस्थान के समस्त जिलाधिकारी।
विषयः गेहूँ की लेवी
महोदय,
राजस्थान के महामहिम राज्यपाल द्वारा मुझे
आपको यह सूचित करने का आदेश हुआ है कि खाद्यान्न संकट को देखते हुए इस वर्ष
प्रत्येक गाँव और प्रत्येक किसान से गेहूँ अनिवार्य लेवी के लिए आवश्यक कदम उठाये
और समुचित व्यवस्था की जाये। इससे राजस्थान सरकार को गेहूँ का पर्याप्त संग्रह
करने में सहायता मिलेगी।
हस्ताक्षर-
मुख्य सचिव
4. अनुस्मारक या स्मरण पत्र
(Reminder)
जब भेजे गये पत्र का
उत्तर बहुत दिनों तक नहीं आता तो उस पत्र की याद दिलाते हुए जो पत्र भेजा जाता है,
उसे अनुस्मारक या स्मरण पत्र कहते हैं। इसमें पत्र का प्रारूप पहले पत्र जैसा ही
रखा जाता है। इस पत्र को स्थिति के अनुसार नम्र या थोड़ी कड़ी भाषा में लिखा जा सकता
है।
एक अनुस्मारक के बाद और भी कई अनुस्मारक भेजने
पड़ सकते हैं। बाद वाले अनुस्मारकों में पहले पत्रों की संख्या का उल्लेख कर देना
चाहिए। अनुस्मारक का आकार सामान्य पत्रों की अपेक्षा काफी छोटा होता है।
5. अर्द्धशासकीय या अर्द्धसरकारी पत्र
(Semi-Official Letter)
अर्द्धशासकीय या अर्द्धसरकारी पत्र भी एक प्रकार का
सरकारी पत्र ही होता है। दोनों में अन्तर केवल अनौपचारिकता-औपचारिकता का हैं।
अर्द्धशासकीय पत्र अनौपचारिक होते हैं और शासकीय पत्र औपचारिक। ये पत्र किसी
व्यक्ति को व्यक्तिगत रूप से लिखे जाते हैं।
जब कोई अधिकारी किसी दूसरे अधिकारी से
व्यक्तिगत स्तर पर कोई जानकारी चाहता है या किसी बात की ओर ध्यान आकर्षित करना
चाहता है तो वह अर्द्धशासकीय पत्र को माध्यम बनाता है। अधिकारी चाहता है कि दूसरा
अधिकारी व्यक्तिगत रुचि लेकर काम को निबटा दे। इससे कार्यालयी जंजाल में फंसे हुए
मामले शीघ्र निबट जाते हैं।
सामान्यतः निम्नांकित परिस्थितियों
में अर्द्धशासकीय पत्र लिखे जाते हैं-
- जब
कार्य सम्पन्न होने में विलम्ब हो रहा हो।
- कार्य
को शीघ्र सम्पन्न कराना हो।
- जब
पत्र पाने वाला अधिकारी उस कार्य की ओर ध्यान न दे पाया हो।
अर्द्धशासकीय
पत्र-लेखन की रीति
- यह
व्यक्तिगत और अनौपचारिक पत्र है। इसे एक अधिकारी व्यक्तिगत रूप से दूसरे
अधिकारी को व्यक्तिगत नाम से लिखता और भेजता है।
- अर्द्धशासकीय
पत्र उत्तमपुरुष, एक वचन (मैं) शैली में लिखा जाता है।
- अर्द्धशासकीय
पत्र की भाषा आत्मीय और मैत्रीभाव से युक्त होती है।
- सम्बोधन
में प्रिय श्री, प्रिय, श्रीयुत…..जी आदि का प्रयोग होता है।
- ऊपर
बायीं ओर प्रेषक का नाम-पद पता लिखा रहता है।
- नीचे
पत्र भेजने वाला अधिकारी केवल हस्ताक्षर करता है। पद-नाम-पता नहीं लिखा जाता।
- पत्र
के अन्त में नीचे दायीं ओर हस्ताक्षर के पूर्व स्वनिर्देश स्वरूप सद्भावी,
आपका, भवनिष्ठ आदि लिखा जाता है। ‘भवदीय’ जैसे औपचारिक शब्द का प्रयोग प्रायः
नहीं किया जाता है।
- अर्द्धशासकीय
पत्र सीधे सम्बन्धित अधिकारी को ही दिये जाते हैं। अन्य डाक सामग्री की तरह
कार्यालय में ही खोलकर अधिकारी के सामने प्रस्तुत नहीं किये जाते हैं।
- यदि
आवश्यक हो तो उस पर ‘गोपनीय’ लिख दिया जाता है ताकि कोई कर्मचारी उसे खोलने
की भूल न करें।
- पत्र
पाने वाले अधिकारी का नाम-पद-पता पत्र के अन्त में नीचे बायी ओर लिख दिया
जाता है।
उदाहरण-
कमलेश महाजन,
सचिव,
मानव संसाधन मंत्रालय
नई दिल्ली।
भारत सरकार
मानव संसाधन मंत्रालय
नई दिल्ली
अर्द्धशासकीय पत्रांक
75/शि.वि./76/200 |
दिनांक 3.9.2020 |
प्रिय
श्री मेहता,
कृपया इस विभाग के पत्रांक 25/ने.रो./222/200
दिनांक 28.7.201…. को देखने का कष्ट करें। पत्र में मांगी गयी सूचना अभी तक प्राप्त
नहीं हुई है।
साग्रह अनुरोध है कि नेहरू रोजगार योजना
की क्रियान्विति के यथा तथ्य आँकडे अपनी टिप्पणी सहित अविलम्ब भेजने का कष्ट करें।
शुभकामनाओं
सहित,
आपका
हस्ताक्षर
सेवा
में,
श्री मंगलचन्द मेहता
मुख्य सचिव, राजस्थान सरकार,
जयपुर-302004
6. अधिसूचना
(Notification)
सरकार
के राजपत्र (गजट) में प्रकाशित होने वाली सूचना को अधिसूचना कहा जाता है। ध्यान
रखें कि-
- अधिसूचना
का क्षेत्र बहुत व्यापक है। उच्च अधिकारियों की नियुक्ति, प्रतिनियुक्ति,
स्थानान्तरण, अधिनियमों में संशोधन आदि बहुत से क्षेत्र अधिसूचना की सीमा में
आते हैं।
- सरकार
की ओर से अधिसूचना जनसाधारण, सरकारी कार्यालयों, सम्बन्धित अधिकारियों,
कर्मचारियों की जानकारी के लिए जारी की जाती है।
- अधिसूचना
में यह बताना नितान्त आवश्यक है कि उसे गजट के किस भाग में प्रकाशित किया
जाना है। भाग के साथ अनभाग का भी उल्लेख आवश्यक है।
- अधिसूचना
में किसी को भी महोदय जैसा कोई सम्बोधन नहीं होता है।
- अधिसूचग
अन्य पुरुष शैली में लिखी जाती है।
- अन्त
में भवदीय, आपका, आदि स्वनिर्देश का प्रयोग नहीं होता है।
उदाहरण-
(भारत के राजपत्र भाग 2 अनुभाग 4
में प्रकाशनार्थ)
भारत सरकार
कृषि मंत्रालय
नई दिल्ली
दिनांक 25.9.2020
श्री राजबली उपाध्याय आई. ए. एस. को जो वर्तमान में
राजस्थान सरकार में हैं दिनांक 30.9.2020 से कृषि मंत्रालय में अवर सचिव के रूप
में प्रतिनियुक्त किया जाता है।
हस्ताक्षर
सचिव
भारत सरकार
अधिसूचना-संख्या 40/9/200
उपर्युक्त अधिसूचना की प्रतिलिपि निम्नलिखित को सूचनार्थ प्रेषित है-
- स्थापना
शाखा, कृषि मंत्रालय, नई दिल्ली।
- कोषाधिकारी,
नई दिल्ली।
- मुख्य
सचिव, राजस्थान सरकार, जयपुर।
- श्री
राजबली उपाध्याय, आई.ए.एस., राजस्थान सरकार।
- प्रबन्धक,
मुद्रणालय, नई दिल्ली।
7. कार्यालय ज्ञापन
(Office Memorandum)
कार्यालय ज्ञापन का प्रयोग विभिन्न मंत्रालयों के
मध्य सूचनाओं के आदान-प्रदान करने हेतु किया जाता है। कार्यालय ज्ञापन के सम्बन्ध
में निम्नलिखित बातों का ध्यान रखना आवश्यक होता है-
- कार्यालय
ज्ञापन अन्य पुरुष शैली में लिखा जाता है।
- इसमें
महोदय, प्रिय महोदय, जैसे सम्बोधन नहीं होते हैं।
- अन्त
में भवदीय, आपका आदि भी नहीं लिखा जाता है। भेजने वाले अधिकारी के हस्ताक्षर
नाम-पद-पता नहीं लिखा जाता है।
- ज्ञापन
पाने वाले मंत्रालय का नाम अन्त में बायीं ओर लिखते हैं।
- अधीनस्थ
कार्यालयों के साथ इस प्रकार के ज्ञापन प्रयोग में नहीं लाये जाते।
- कार्यालय
ज्ञापन में प्रायः ‘अधोहस्ताक्षरी को यह निर्देश हुआ है’ जैसे किसी वाक्य से
पत्र का प्रारम्भ किया जाता है।
- ज्ञापन
में विषय लिखा जाता है।
उदाहरण-
संख्या 35.11.200
राजस्थान सरकार,
शिक्षा मंत्रालय,
भाषा विभाग
जयपुर, दिनांक
6.9.2020
विषय-राजभाषा हिन्दी का प्रयोग
अधोहस्ताक्षरी को राजभाषा हिन्दी के प्रयोग सम्बन्धी
शासनादेश संख्या 525/रा.भा./200 दिनांक 1.8.201…. की ओर ध्यान आकर्षित करने का
निर्देश हुआ है कि उसके पालन के प्रति अपेक्षित ध्यान नहीं दिया जा रहा है। अतः
राज्य सरकार के सभी विभागों, कार्यालयों को पुनः निर्देश दिया जाता है कि भविष्य
में सम्पूर्ण पत्राचार राजभाषा हिन्दी में ही किया जाए।
हस्ताक्षर
संयुक्त सचिव,
राजस्थान सरकार, जयपुर
सेवा
में,
राजस्थान राज्य के समस्त मंत्रालय विभाग
8. ज्ञापन
(Memorandum)
कार्यालय ज्ञापन और ज्ञापन की रूपरेखा में कोई विशेष
अन्तर नहीं होता। इन दोनों के बीच केवल यह अन्तर होता है कि कार्यालय ज्ञापन का
प्रयोग विभिन्न मंत्रालयों के बीच किया जाता है और ज्ञापन का प्रयोग किसी एक
मंत्रालय अथवा विभाग के अन्दर ही होता है। ज्ञापन में आवेदन-पत्रों के उत्तर
पत्र-प्राप्ति की सूचना, याचिकाओं आदि के उत्तर दिये जाते हैं।
उदाहरण-
संख्या 22.8.200
राजस्थान सरकार
कॉलेज शिक्षा निदेशालय
शिक्षा विभाग
जयपुर,
दिनांक 6.9.2020
विषय-व्याख्याताओं की तदर्थ
नियुक्ति
श्री हरस्वरूप पारीक को उनके आवेदन पत्र दिनांक
6.9.201…. के सन्दर्भ में सूचित किया जाता है कि राज्य सरकार ने तदर्थ नियुक्ति के
लिए विश्वविद्यालय अनुदान आयोग द्वारा निर्धारित नियमों को स्वीकार कर लिया है।
आवेदन पत्र और नियमावली के लिए 50/-(पचास
रुपये मात्र) का मनीऑर्डर इस कार्यालय के उपनिदेशक, अकादमी शाखा के नाम भेजें।
हस्ताक्षर
संयुक्त निदेशक
कॉलेज शिक्षा
श्री हरस्वरूप परीक,
24 बापू नगर,
जयपुर।
9. अशासनिक पत्र
(Non-official Letter)
अशासनिक पत्र को अनौपचारिक निर्देश या अशासनिक
टिप्पणी भी कहते हैं। इस पत्र का उपयोग किसी मंत्रालय, विभाग से किसी बात, समस्या
या प्रस्ताव पर उसकी सम्पति, विचार टिप्पणी या किसी पूर्व आदेश-निर्देश का
स्पष्टीकरण चाहा जाता है।
अशासनिक पत्र दो रूपों में लिखे जाते
हैं-
- सम्बन्धित
फाइल पर ही टिप्पणी लिखकर उसे सम्बन्धित मंत्रालय या विभाग को भेज दिया जाता
है।
- स्वतन्त्र
रूप से टिप्पणी लिखकर भेज दी जाती है, फाइल नहीं भेजी जाती।
अशासनिक पत्र में किसी विशेष
औपचारिकता का निर्वाह नहीं किया जाता। इसमें-
- कोई
सम्बोधन नहीं होता।
- इसमें
स्वनिर्देश भी नहीं होता है।
- ऊपर
मंत्रालय, विभाग का नाम, स्थान और दिनांक अन्य पत्रों की तरह ही दिया जाता
है।
- इसके
बाद विषय लिखा जाता है।
- नीचे
हस्ताक्षर और पद नाम होता है।
उदाहरण-
कार्मिक विभाग
राजस्थान सरकार
जयपुर,
दिनांक 16 सितम्बर, 2020
विषय-व्याख्याताओं की वरीयता
क्रम
शासनादेश सं. 37/4क/200 दिनांक 1.2.201…. के अनुसार
21.1.201…. तक तदर्थ रूप में नियुक्त सभी महाविद्यालयी व्याख्याताओं को स्थायी
आधार पर नियुक्त मान लिया गया है। अब ये व्याख्याता वरीयता क्रम के निर्धारण में
अपने अस्थायी सेवाकाल को भी सम्मिलित करवाना चाहते हैं।
इस सम्बन्ध में विधि विभाग के निर्देश आवश्यक
प्रतीत होते हैं, अत: यह विभाग विभाग विधि विभाग से वास्तविक वैधानिक स्थिति को
स्पष्ट करने का आग्रह करता है।
हस्ताक्षर
उप सचिव
विधि
विभाग
राजस्थान सरकार
अशासनिक टिप्पणी संख्या 11/का.वि./74/200
10. पृष्ठांकन
(Endorsement)
मूल पत्र या उसकी प्रतिलिपि जिस अन्य विभागों को भेजी
जाती है, उनका उल्लेख नीचे किया जाता है, इसी को पृष्ठांकन कहते हैं। पृष्ठांकन के
पूर्व इस प्रकार के वाक्य लिखे जाते हैं-
- मूल
पत्र या प्रतिलिपि सूचनार्थ
- आवश्यक
कार्रवाई हेतु
- शीघ्र
अनुपालनार्थ
- रिकॉर्ड
के लिए
- शीघ्र
उत्तर देने के लिए
- क,
ख, ग का मूल रूप में
- अ,
ब, स को आवश्यक जाँच के लिए
- क,
ख, ग को उनके पत्रांक………दिनांक………के उत्तर में प्रेषित है।
उदाहरण-
पृष्ठांकन
संख्या 69/का.शि.नि./35/201
राजस्थान सरकार
गृह विभाग जयपुर, दिनांक 17.9.2020
प्रतिलिपि निम्नांकित को सूचनार्थ एवं आवश्यक कार्यवाही हेतु प्रेषित है-
- वित्त
विभाग, राजस्थान सरकार
- विधि
विभाग, राजस्थान सरकार
- कार्मिक
विभाग, राजस्थान सरकार
हस्ताक्षर
उपसचिव,
गृह विभाग,
राजस्थान सरकार
11. संकल्प या संस्ताव
(Resolution)
अधिसूचना की तरह ही संकल्प या संस्ताव भी राजपत्र
(गजट) में प्रकाशित किये जाते हैं। गजट के भाग-अनुभाग का उल्लेख आवश्यक होता है।
संकल्प का प्रयोग निम्नांकित कार्यों के लिए किया जाता है-
- नीतिगत
प्रश्नों पर सरकारी निर्णय की घोषणा के लिए।
- किसी
समस्या पर निष्पक्ष सम्मति के लिए आयोग या जाँच समिति की घोषणा के लिए।
- आयोग
या जाँच समिति के प्रतिवेदन की घोषणा के लिए।
संकल्प
में विषय की पृष्ठभूमि और कारण, सरकारी आदेश और जिनको प्रतियाँ भेजनी होती है,
उनका उल्लेख किया जाता है।
उदाहरण-
(सरकार के राजपत्र भा 4 खण्ड 3
में प्रकाशनार्थ)
संख्या 85/उ.वि./145/201
शासन सचिवालय
उत्तर प्रदेश सरकार
लखनऊ,
दिनांक 18.9.2020
संकल्प
प्रदेश के विशिष्ट क्षेत्रों में बढ़ते हुए
साम्प्रदायिक एवं जातिगत संघर्ष और तनाव को देखते हुए सरकार ने एक समिति गठित की
है। यह समिति साम्प्रदायिक एवं जातिगत संघर्ष और तनाव के कारणों पर विचार करेगी और
निवारण के लिए अपने सुझाव दिनांक 18.12.2020 तक सरकार को देगी। इस समिति में
निम्नलिखित सदस्य होंगे-
- श्री
रामसिंह यादव, संसद सदस्य।
- श्री
शंकरलाल शर्मा, सचिव, गृह विभाग, उत्तर प्रदेश सरकार।
- मौलाना
श्री अब्दुल करीम, अध्यक्ष, साम्प्रदायिक शान्ति सेना।
इस
समिति के अध्यक्ष श्री रामानंद यादव होंगे।
हस्ताक्षर….
मुख्य सचिव,
उत्तर प्रदेश सरकार
लखनऊ 18.9.2020
संख्या
39/म.स./37/201
आदेश दिया जाता है कि इस संकल्प की प्रतिलिपि
उपर्युक्त तीनों महानुभावों को भेज दी जाए।
यह भी आदेश दिया जाता है कि सचिव, गृह विभाग
और प्रबन्धक, राजकीय मुद्रालय को भी आवश्यक कार्यवाही हेत प्रतिलिपि भेज दी जाए। हस्ताक्षर
मुख्य सचिव
12. स्वीकृति या मंजूरी-पत्र
(Sanction Letter)
राष्ट्रपति या राज्यपाल की
स्वीकृति प्राप्त होने पर ही स्वीकृति-पत्र लिखा जाता है। जिन मामलों में वित्तीय
प्रावधान करने होते हैं, उनकी पूर्व स्वीकृति राष्ट्रपति या राज्यपाल, से लेना
आवश्यक होता है। मान लीजिए किसी विभाग में कोई नया पद सृजित करना है तो ऐसा करने
के पूर्व सरकार को राष्ट्रपति या राज्यपाल की स्वीकृति लेनी होती है। स्वीकृति मिल
जाने के बाद ही कोई नया पद सृजित किया जा सकता है। इस तरह की स्वीकृतियों की
प्रतियाँ महालेखापाल या लेखापाल एवं वित्त मंत्रालय या वित्त विभाग को अवश्य भेजी
जाती हैं। स्वीकृति पत्र सरकार की ओर से सम्बन्धित विभाग को लिखे जाते हैं।
उदाहरण-
संख्या 704/शि.का./370/201
शासन सविचालय,
राजस्थान सरकार, जयपुर
दिनांक 17.9.20120
प्रेषक
प्रियरंजन
ठाकुर
मुख्य
सचिव,
राजस्थान
सरकार, जयपुर।
सेवा में,
शिक्षा-आयुक्त
कॉलेज
शिक्षा,
जयपुर।
विषय-कॉलेज शिक्षा निदेशालय में
संयुक्त निदेशक पद की स्वीकृति
महोदय,
मुझे आपको यह सूचित करने का निर्देश मिला है
कि महामहिम राज्यपाल ने आपके कॉलेज शिक्षा निदेशालय में जोधपुर प्रभाग के लिए
15000-500-20,000 के वेतनमान में एक संयुक्त निदेशक के पद की स्वीकृति प्रदान कर दी
है। पद पर होने वाले व्यय के लिए वित्तीय प्रावधान करने की भी स्वीकृति प्राप्त हो
चुकी है।
भवदीय
हस्ताक्षर..
मुख्य सचिव,
राजस्थान सरकार
दिनांक 17.9.2020
संख्या
: 471/201
प्रतिलिपि सूचनार्थ एवं आवश्यक कार्यवाही हेतु निम्नांकित को प्रषित
है-
- वित्त विभाग
- लेखपाल
- कार्मिक विभाग हस्ताक्षर…. ,
13. प्रेस विज्ञप्ति
(Press Communique/Press-note)
महत्त्वपूर्ण सरकारी आदेश, प्रस्ताव अथवा निर्णय के
व्यापक सार्वजनिक प्रचार के लिए समाचार-पत्रों में प्रकाशनार्थ भेजी जाने वाली विज्ञप्ति
को प्रेस विज्ञप्ति या प्रेस नोट कहा जाता है।
- समाचार-पत्र
का सम्पादक प्रेस विज्ञप्ति में कोई काट-छाँट नहीं कर सकता, उसे ज्यों का
त्यों छापना होता है।
- किन्तु
जब कोई सामग्री प्रेस नोट के रूप में प्रकाशन के लिए भेजी जाती है तो सम्पादक
उसे सम्पादित कर सकता है, उसे छोटा रूप भी दिया जा सकता है।
- प्रेस
विज्ञप्ति अथवा प्रेस नोट में सबसे ऊपर यह भी लिखा रहता है कि इसे किस तिथि
को प्रकाशित किया जाना है। समय से पूर्व उसका प्रकाशन नहीं किया जा सकता।
- प्रेस
विज्ञप्ति या प्रेस नोट का अपना एक शीर्षक होता है। सम्बोधन और स्वनिर्देश
नहीं होता।
- अन्त
में नीचे बायीं ओर हस्ताक्षर तथा पद-नाम लिखा जाता है।
- अन्त
में नीचे बायीं ओर मंत्रालय का नाम और दिनांक लिखे जाते हैं।
- विज्ञप्ति
को सीधे समाचार-पत्र कार्यालयों में न भेजकर सूचना अधिकारी के पास भेजा जाता
है।
उदाहरण-
दिनांक 20.9.2012 के पूर्व
प्रकाशित और प्रसारित न किया जाए।
प्रेस विज्ञप्ति
भारत
और चीन के बीच वर्षों से चले आ रहे सीमा-विवाद पर समझौता हो चुका है। समझौते पर दोनों
देशों के प्रधानमंत्रियों ने सहमति स्वरूप हस्ताक्षर कर समझौते को लागू करने की स्वीकृति
प्रदान की है। सीमा-रेखा के निर्धारण के लिए विवादग्रस्त क्षेत्र के मध्य भाग की रेखा-सीमा
मानकर दोनों देशों का मान्य समाधान स्वीकार किया गया है।
सूचना अधिकारी, प्रेस सूचना ब्यूरो, भारत
सरकार नई दिल्ली के प्रकाशनार्थ प्रेषित।
हस्ताक्षर..
सचिव,
भारत सरकार
परराष्ट्र
मंत्रालय,
नई
दिल्ली
दिनांक
15.9.2020
हस्ताक्षर..
सचिव, भारत सरकार
परराष्ट्र मंत्रालय,
नई दिल्ली
दिनांक 15.9.2020
14. सूचना
(Notice)
प्रेस विज्ञप्ति की भाँति ही सूचना भी समाचार-पत्रों
में प्रकाशित की जाती है सरकार सार्वजनिक जीवन और हित के मामलों को सर्वसाधारण तक
पहुँचाने के लिए जिन साधनों को काम में लाती है, उनमें सूचना का महत्त्वपूर्ण
स्थान होता है। अधिकांश सरकारी विज्ञापन भी सूचना की सीमा में आते हैं।
इसके अतिरिक्त रोजगार सम्बन्धी सूचना, किसी
व्यक्ति को न्यायालय में उपस्थित होने की सूचना आदि सूचना के कई रूप होते हैं।
व्यावसायिक संस्थान भी अनेक प्रकार की सूचनाएँ प्रकाशित कराते रहते हैं। सूचना के
अन्त में सूचना प्रकाशित करने वाले अधिकारी का नाम व पदनाम दिया जाता है, पर
कभी-कभी ऐसा नहीं भी होता है, केवल नाम ही लिखा जाता है।
सार्वजनिक जीवन से जुडी सूचनाओं को प्रारम्भ
सर्वसाधारण को सूचित किया जाता है कि ….. “जैसे किसी वाक्य से होता है। ऐसी
सूचनाओं का दैनिक समाचार-पत्रों में प्रकाशित होना एक आम बात है।”
उदाहरण-
कार्यालय पंचायत समिति, दौसा
क्रमांक: लेखा/हड्डी/25/201 |
दिनांक
19.9.2020 |
नीलामी हड्डी ठेका वर्ष 2021
सर्वसाधारण को सूचनार्थ प्रकाशित किया जाता है कि
पंचायत समिति दौसा क्षेत्र के मृतक पशुओं की हड्डियाँ उठाने का ठेका 2021 के लिए
पंचायत समिति मुख्यालय पर दिनांक 28.9.2020 को दोपहर तीन बजे से पाँच बजे तक खुली
बोली द्वारा नियमानुसार नीलाम किया जायेगा।
बोली लगाने से पूर्व 5000/-रुपये धरोहर राशि
के रूप में जमा कराने होंगे। शेष शर्तों और नियमों की जानकारी कार्यालय समय में
अधोहस्ताक्षरी से प्राप्त की जा सकती है।
हस्ताक्षर……….
नाम……….
विकास अधिकारी,
पंचायत समिति, दौसा
15. पावती
(Acknowledgement)
प्रधानमंत्री, मुख्यमंत्री या अन्य मंत्रियों के पास
प्रतिदिन ऐसे पत्र आते रहते हैं जिनमें किसी कार्यालय या अधिकारी की शिकायत की
जाती है। अपनी व्यक्तिगत समस्या से अवगत करवा कर सहायता की माँग की जाती है और भी
अनेक प्रकार के पत्र लिखे जाते रहते हैं। इस प्रकार के सभी पत्रों को बड़े लोगों
द्वारा पढ़ा जाना सम्भव नहीं होता। निजी सचिव या सहायक
पत्रों को आवश्यक कार्यवाही के लिए सम्बन्धित कार्यालय या अधिकारी के पास भेज देता
है।
परंतु शिष्टाचारवश पत्र प्रेषक को सन्तोष देने
हेतु पत्र-प्राप्ति की स्वीकृति अथवा सूचना भेज दी जाती है। इस तरह के पावती पत्र
पहले से छपे या अंकित रहते हैं, उनमें उस व्यक्ति विशेष का केवल नाम और दिनांक
भरना होता है।
उदाहरण-
श्री विनय शर्मा |
मुख्यमंत्री |
प्रिय महोदय, आपका दिनांक 20.9.2020 का पत्र
मुख्यमंत्रीजी को प्राप्त हो गया है। आप निश्चिन्त रहें, उस पर कार्रवाई शुरू कर
दी गयी है।
भवदीय,
हस्ताक्षर….
निजी सचिव,
मुख्यमंत्री,
राजस्थान सरकार, जयपुर।
16. तार
(Telegram)
जब तत्काल कार्रवाई आवश्यक होती है तब तार का उपयोग
किया जाता है। तार चूँकि छोटा पत्र-रूप है इसलिए इसमें संक्षिप्ति और स्पष्टता
आवश्यक होती है। तार के दो रूप होते हैं –
- सरल
और स्पष्ट तार (Simple and Clear Telegram)
- बीजांक
या कूटभाषा तार (Cypher or Code Telegram)
पहले
तार की भाषा सरल और स्पष्ट होती है। उन्हें कोई भी आसानी से समझ सकता है । दूसरे
तार की भाषा कूट-भाषा होती है। इसमें गोपनीय संदेश भेजे जाते हैं। पहले प्रकार के
तार की पुष्टि के लिए डाक से प्रतिलिपि या पत्र भेजा जाता है, पर कूट-भाषा-तार की
पुष्टि नहीं की जाती।
विषय या समस्या की गम्भीरता प्रदर्शित
करने के लिए तारों पर निम्नांकित संकेत शब्द लिखे जाते हैं-
- आवश्यक
या महत्त्वपूर्ण (Important)
- अत्यावश्यक
(Urgent)
- तात्कालिक
(Immediate)
- जीवन
रक्षा हेतु संकट-संदेश (S.D.S)
- सैन्य
तात्कालिक (Operation Immediate)
उदाहरण-
तार |
सरकार |
अत्यावश्यक |
——————————————————————————–
प्राचार्य, राजकीय महाविद्यालय, दौसा
——————————————————————————–
प्राचार्य
सम्मेलन 26 सितम्बर को
निदेशक
तार
में शामिल न किया जाये
संख्या
25 /38 दिनांक 23 सितम्बर, 2020
निदेशक,
कॉलेज शिक्षा, जयपुर।
17. मितव्यय पत्र
(Saving-ram)
मितव्यय पत्र विदेश स्थित दूतावासों के माध्यम से
विदेशी सरकारों को भेजा जाने वाला तार ही होता है। इन तारों को हवाई डाक से
कूटनीतिक थैले में बन्द करके भेजा जाता है। इन पर मितव्यय पत्र लिखा रहता है। यदि
कोई गोपनीय सन्देश देना होता है तो कूट-भाषा का प्रयोग किया जाता है।
उदाहरण-
मितव्यय पत्र
भारत सरकार
परराष्ट्र मंत्रालय
प्रेषक-
परराष्ट्र नई दिल्ली
सेवा में,
भारत दूतावास, मास्को।
मास्को सरकार
को सूचित कर दें कि भूकम्प पीड़ितों की सहायता के लिए भारत सरकार पचास हजार टन चावल,
बीस हजार टन दूध पाउडर और एक करोड़ जीवन रक्षक गोलियाँ तुरन्त भेज रही है।
हस्ताक्षर
सचिव, भारत
सरकार
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